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Showing posts from December, 2018

क्या अमरीका की हिदायत से राजस्थान नहीं जाएंगे पर्यटक?

अमरीकी संस्था सेंटर फॉर डिजीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने राजस्थान को ज़ीका प्रभावित मानते हुए गर्भवती महिलाओं को वहां नहीं जाने की सलाह दी है. लेकिन राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि अब ज़ीका का कोई असर नहीं है, क्योंकि इस पर काबू पा लिया गया है. अमरीकी संस्था की यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब राजस्थान में देशी-विदेशी सैलानियों की बड़े पैमाने पर आमद होती है. सर्दी का मौसम और माहौल , पर्यटन के लिए बहुत मुफीद माना जाता है. राजपुताना हॉलिडे मेकर्स के संजय कौशिक कहते हैं, "ज़ीका को लेकर अमरीका का यह अलर्ट पर्यटन पर कोई ज़्यादा प्रभाव नहीं डाल पाएगा, क्योंकि पर्यटकों में माँ बनने वाली महिलाओं की संख्या बहुत कम होती हैं." संजय कौशिक कहते हैं, "यह ऐसा समय है जब सैलानी अपनी यात्राओं की तैयारी कर चुके होते हैं. मुझे नहीं लगता कि कोई भी सैलानी अपनी यात्रा रद्द करेगा." राजस्थान पर्यटन के एक अधिकारी ने बीबीसी से कहा कि स्वास्थ्य महकमा पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि इलाक़ा ज़ीका के ख़तरे से बाहर है, ऐसे में इस चेतावनी का कोई ख़ास असर नहीं होगा. वैसे भी सैलानि...

अमरीका में क्यों चर्चित है 66 साल की यामिनी की रसोई

66 साल की यामिनी जोशी न्यूयॉर्क सिटी के क्वीन्स में अपने घर की रसोई में खाना बना रही हैं. उनके आसपास कई लोग खड़े हैं जो उनको काम करते हुए बारीकी से देख रहे हैं. कई तरह की पतीलियों में सब्ज़ियां पकाते हुए यामिनी कहती हैं, "ऐसा लगता है कि मैं दुनिया से बाहर हूं. मैं किसी और चीज के बारे में नहीं सोचती . मैं कोशिश करती हूं कि 100 फ़ीसदी वही स्वाद आए." यामिनी अमरीका में भारतीय मूल की प्रवासी हैं. वो मुंबई की हैं और न्यूयॉर्क सिटी में रहती हैं. वो कुकिंग इंस्ट्रक्टर हैं जो खाना बनाना सीखने के इच्छुक युवाओं को अपनी रसोई में ट्रेनिंग देती हैं. यामिनी न्यूयॉर्क के मुख्य बिज़नेस सेंटर मैनहट्टन में एक जूलरी शॉप में काम करती हैं. हफ़्ते में कम से कम तीन वीकेंड पर वह अपने छात्रों के एक समूह को भोजन तैयार करना सिखाती हैं. यह ट्रेनिंग देने से उनकी कमाई भी होती है, जिससे उनको न्यू यॉर्क सिटी में अपने खर्च पूरे करने में मदद मिलती है. वो कहती हैं, "मैं एक जूलरी कंपनी में काम करती हूं. वहां से मैं जो भी कमाती हूं, वह मेरे लिए पर्याप्त नहीं है. खाना बनाना मेरा जुनून है. इससे मेर...

क्या अमित शाह ने स्वास्तिक का अपमान किया?

इस तस्वीर में अमित शाह एक चौकी पर खड़े होकर चुनावी जनसभा को संबोधित करते दिख रहे हैं. जिस चौकी पर अमित शाह खड़े हैं उस पर 'स्वास्तिक चिह्न' बना हुआ है जिसे भारतीय संस्कृति में हिंदू धर्म का 'मंगल प्रतीक' माना जाता है. सोशल मीडिया पर कुछ लोग अमित शाह के 'स्वास्तिक चिह्न' पर जूते पहनकर खड़े होने की आलोचना कर रहे हैं और इस तस्वीर को व्हॉट्सऐप पर भी शेयर कर रहे हैं. कांग्रेस की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने भी रविवार रात ये तस्वीर शेयर की और अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा, "भगवान के मंदिर से नोट लेंगे और फिर आस्था को चोट देंगे." हालांकि भाजपा नेता ऐसी किसी भी घटना से इनकार कर रहे हैं और कह रहे हैं कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने ऐसी किसी चौकी पर पाँव नहीं रखा जिस पर धार्मिक चिह्न बना हो. दक्षिणपंथी रुझान रखने वाले फ़ेसबुक पन्नों और ग्रुप्स में कथित तौर पर कांग्रेस द्वारा फैलाई गई इस तस्वीर की सत्यता पर सवाल उठाया गया है. लेकिन हमने अपनी पड़ताल में पाया कि ये तस्वीर सही है. इस तस्वीर को अमित शाह ने ही सोशल मीडिया पर शेयर किया था और बाद में विवाद ...