क्या अमित शाह ने स्वास्तिक का अपमान किया?
इस तस्वीर में अमित शाह एक चौकी पर खड़े होकर चुनावी जनसभा को संबोधित करते दिख रहे हैं. जिस चौकी पर अमित शाह खड़े हैं उस पर 'स्वास्तिक चिह्न' बना हुआ है जिसे भारतीय संस्कृति में हिंदू धर्म का 'मंगल प्रतीक' माना जाता है.
सोशल मीडिया पर कुछ लोग अमित शाह के 'स्वास्तिक चिह्न' पर जूते पहनकर खड़े होने की आलोचना कर रहे हैं और इस तस्वीर को व्हॉट्सऐप पर भी शेयर कर रहे हैं.
कांग्रेस की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने भी रविवार रात ये तस्वीर शेयर की और अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा, "भगवान के मंदिर से नोट लेंगे और फिर आस्था को चोट देंगे."
हालांकि भाजपा नेता ऐसी किसी भी घटना से इनकार कर रहे हैं और कह रहे हैं कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने ऐसी किसी चौकी पर पाँव नहीं रखा जिस पर धार्मिक चिह्न बना हो.
दक्षिणपंथी रुझान रखने वाले फ़ेसबुक पन्नों और ग्रुप्स में कथित तौर पर कांग्रेस द्वारा फैलाई गई इस तस्वीर की सत्यता पर सवाल उठाया गया है.
लेकिन हमने अपनी पड़ताल में पाया कि ये तस्वीर सही है. इस तस्वीर को अमित शाह ने ही सोशल मीडिया पर शेयर किया था और बाद में विवाद बढ़ता देख, इसे डिलीट भी कर दिया.
तीन बड़े सवाल और जवाब
चुनावी माहौल के दौरान हमें कई ऐसी तस्वीरें और वीडियो मिल चुके हैं जिनके साथ गंभीर छेड़छाड़ की गई या उनके संदर्भ को पूरी तरह से बदल दिया गया था.
इस वजह से अपनी पड़ताल में हमारे लिए कुछ सवालों के जवाब ढूंढना बहुत ज़रूरी था. जैसे:
ये तस्वीर कब की है?
और क्या वाक़ई अमित शाह भाषण के दौरान किसी चौकी पर खड़े हुए थे?
'रिवर्स इमेज सर्च' से हमें पता चला कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की ये तस्वीर राजस्थान के बाड़मेर ज़िले की है.
इस तस्वीर को शनिवार, एक दिसंबर की दोपहर 2:06 से 2:40 बजे के बीच खींचा गया था.
ट्विटर पर 'ऑफ़िस ऑफ़ अमित शाह' द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, एक दिसंबर को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह बाड़मेर ज़िले के बायतु और बालोतरा में पार्टी के प्रचार के लिए गए थे.
सोशल मीडिया पर कुछ लोग अमित शाह के 'स्वास्तिक चिह्न' पर जूते पहनकर खड़े होने की आलोचना कर रहे हैं और इस तस्वीर को व्हॉट्सऐप पर भी शेयर कर रहे हैं.
कांग्रेस की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने भी रविवार रात ये तस्वीर शेयर की और अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा, "भगवान के मंदिर से नोट लेंगे और फिर आस्था को चोट देंगे."
हालांकि भाजपा नेता ऐसी किसी भी घटना से इनकार कर रहे हैं और कह रहे हैं कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने ऐसी किसी चौकी पर पाँव नहीं रखा जिस पर धार्मिक चिह्न बना हो.
दक्षिणपंथी रुझान रखने वाले फ़ेसबुक पन्नों और ग्रुप्स में कथित तौर पर कांग्रेस द्वारा फैलाई गई इस तस्वीर की सत्यता पर सवाल उठाया गया है.
लेकिन हमने अपनी पड़ताल में पाया कि ये तस्वीर सही है. इस तस्वीर को अमित शाह ने ही सोशल मीडिया पर शेयर किया था और बाद में विवाद बढ़ता देख, इसे डिलीट भी कर दिया.
तीन बड़े सवाल और जवाब
चुनावी माहौल के दौरान हमें कई ऐसी तस्वीरें और वीडियो मिल चुके हैं जिनके साथ गंभीर छेड़छाड़ की गई या उनके संदर्भ को पूरी तरह से बदल दिया गया था.
इस वजह से अपनी पड़ताल में हमारे लिए कुछ सवालों के जवाब ढूंढना बहुत ज़रूरी था. जैसे:
ये तस्वीर कब की है?
और क्या वाक़ई अमित शाह भाषण के दौरान किसी चौकी पर खड़े हुए थे?
'रिवर्स इमेज सर्च' से हमें पता चला कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की ये तस्वीर राजस्थान के बाड़मेर ज़िले की है.
इस तस्वीर को शनिवार, एक दिसंबर की दोपहर 2:06 से 2:40 बजे के बीच खींचा गया था.
ट्विटर पर 'ऑफ़िस ऑफ़ अमित शाह' द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, एक दिसंबर को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह बाड़मेर ज़िले के बायतु और बालोतरा में पार्टी के प्रचार के लिए गए थे.
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