क्या अमरीका की हिदायत से राजस्थान नहीं जाएंगे पर्यटक?
अमरीकी संस्था सेंटर फॉर डिजीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने राजस्थान को ज़ीका प्रभावित मानते हुए गर्भवती महिलाओं को वहां नहीं जाने की सलाह दी है. लेकिन राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि अब ज़ीका का कोई असर नहीं है, क्योंकि इस पर काबू पा लिया गया है.
अमरीकी संस्था की यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब राजस्थान में देशी-विदेशी सैलानियों की बड़े पैमाने पर आमद होती है. सर्दी का मौसम और माहौल, पर्यटन के लिए बहुत मुफीद माना जाता है.
राजपुताना हॉलिडे मेकर्स के संजय कौशिक कहते हैं, "ज़ीका को लेकर अमरीका का यह अलर्ट पर्यटन पर कोई ज़्यादा प्रभाव नहीं डाल पाएगा, क्योंकि पर्यटकों में माँ बनने वाली महिलाओं की संख्या बहुत कम होती हैं."
संजय कौशिक कहते हैं, "यह ऐसा समय है जब सैलानी अपनी यात्राओं की तैयारी कर चुके होते हैं. मुझे नहीं लगता कि कोई भी सैलानी अपनी यात्रा रद्द करेगा."
राजस्थान पर्यटन के एक अधिकारी ने बीबीसी से कहा कि स्वास्थ्य महकमा पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि इलाक़ा ज़ीका के ख़तरे से बाहर है, ऐसे में इस चेतावनी का कोई ख़ास असर नहीं होगा. वैसे भी सैलानियों में गर्भवती महिलाओं की तादाद बहुत कम होती है.
राज्य में चिकित्सा और स्वास्थ्य महकमे के अतिरिक्त निदेशक डॉ. रवि प्रकाश माथुर ने बताया कि स्वास्थ्य के लिहाज से राजस्थान पूरी तरह सुरक्षित है.
डॉ. माथुर के मुताबिक, "ज़ीका का आखिरी मामला 29 अक्तूबर को सामने आया था. इसके बाद ऐसा कोई नया मामला सामने नहीं आया है. विभाग नज़र रखे हुए है और डरने जैसी कोई बात नहीं है."
हर साल डेढ़ लाख सैलानी आते हैं अमरीका से
पर्यटन विभाग के अनुसार राजस्थान में हर साल करीब 16 लाख विदेशी सैलानी आते हैं. इनमें अमरीकी पर्यटकों की संख्या डेढ़ लाख के करीब होती है. इसके अलावा करीब साढ़े चार करोड़ देसी सैलानी भी राजस्थान का रुख करते हैं.
पर्यटन विशेषज्ञ कहते हैं कि ठंड वो वक़्त होता है जब राजस्थान में कई मेले और उत्सव का आयोजन किया जाता है. यहां की आबोहवा भी मुफीद होती है इसलिए पर्यटक ठंड के मौसम में अधिक आना पसंद करते हैं.
अमरीका की चेतावनी वाली इस ख़बर पर पर्यटन कारोबारी ठिठके ज़रूर हैं, लेकिन टूर एंड ट्रेवल का काम करने वाले लोगों का कहना है कि इसका अभी कोई असर देखने को नहीं मिला है.
पर्यटन कारोबारी अनिल सिन्हा कहते हैं, "इस वक्त अप्रवासी भारतीय यानी एनआरआई ज़्यादा आते हैं. उनमें से किसी ने भी अभी तक अपना कार्यक्रम नहीं बदला है. मुझे नहीं लगता कि किसी ने इसे गंभीरता से लिया है."
जयपुर में राजपूताना ट्रेवल के डीएस राणावत कहते हैं कि ज़ीका पर अमरीकन एडवाइजरी का पर्यटकों की आवक पर कोई असर नहीं हुआ. हालांकि राणावत कहते हैं, "पिछले दिनों विधानसभा चुनाव से ज़रूर कुछ सैलानियों ने अपनी यात्रा रद्द कर दी क्योंकि पर्यटकों को लगा चुनाव की रेलम-पेल में उनके प्रवास में खलल पड़ सकती है."
अमरीकी संस्था की यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब राजस्थान में देशी-विदेशी सैलानियों की बड़े पैमाने पर आमद होती है. सर्दी का मौसम और माहौल, पर्यटन के लिए बहुत मुफीद माना जाता है.
राजपुताना हॉलिडे मेकर्स के संजय कौशिक कहते हैं, "ज़ीका को लेकर अमरीका का यह अलर्ट पर्यटन पर कोई ज़्यादा प्रभाव नहीं डाल पाएगा, क्योंकि पर्यटकों में माँ बनने वाली महिलाओं की संख्या बहुत कम होती हैं."
संजय कौशिक कहते हैं, "यह ऐसा समय है जब सैलानी अपनी यात्राओं की तैयारी कर चुके होते हैं. मुझे नहीं लगता कि कोई भी सैलानी अपनी यात्रा रद्द करेगा."
राजस्थान पर्यटन के एक अधिकारी ने बीबीसी से कहा कि स्वास्थ्य महकमा पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि इलाक़ा ज़ीका के ख़तरे से बाहर है, ऐसे में इस चेतावनी का कोई ख़ास असर नहीं होगा. वैसे भी सैलानियों में गर्भवती महिलाओं की तादाद बहुत कम होती है.
राज्य में चिकित्सा और स्वास्थ्य महकमे के अतिरिक्त निदेशक डॉ. रवि प्रकाश माथुर ने बताया कि स्वास्थ्य के लिहाज से राजस्थान पूरी तरह सुरक्षित है.
डॉ. माथुर के मुताबिक, "ज़ीका का आखिरी मामला 29 अक्तूबर को सामने आया था. इसके बाद ऐसा कोई नया मामला सामने नहीं आया है. विभाग नज़र रखे हुए है और डरने जैसी कोई बात नहीं है."
हर साल डेढ़ लाख सैलानी आते हैं अमरीका से
पर्यटन विभाग के अनुसार राजस्थान में हर साल करीब 16 लाख विदेशी सैलानी आते हैं. इनमें अमरीकी पर्यटकों की संख्या डेढ़ लाख के करीब होती है. इसके अलावा करीब साढ़े चार करोड़ देसी सैलानी भी राजस्थान का रुख करते हैं.
पर्यटन विशेषज्ञ कहते हैं कि ठंड वो वक़्त होता है जब राजस्थान में कई मेले और उत्सव का आयोजन किया जाता है. यहां की आबोहवा भी मुफीद होती है इसलिए पर्यटक ठंड के मौसम में अधिक आना पसंद करते हैं.
अमरीका की चेतावनी वाली इस ख़बर पर पर्यटन कारोबारी ठिठके ज़रूर हैं, लेकिन टूर एंड ट्रेवल का काम करने वाले लोगों का कहना है कि इसका अभी कोई असर देखने को नहीं मिला है.
पर्यटन कारोबारी अनिल सिन्हा कहते हैं, "इस वक्त अप्रवासी भारतीय यानी एनआरआई ज़्यादा आते हैं. उनमें से किसी ने भी अभी तक अपना कार्यक्रम नहीं बदला है. मुझे नहीं लगता कि किसी ने इसे गंभीरता से लिया है."
जयपुर में राजपूताना ट्रेवल के डीएस राणावत कहते हैं कि ज़ीका पर अमरीकन एडवाइजरी का पर्यटकों की आवक पर कोई असर नहीं हुआ. हालांकि राणावत कहते हैं, "पिछले दिनों विधानसभा चुनाव से ज़रूर कुछ सैलानियों ने अपनी यात्रा रद्द कर दी क्योंकि पर्यटकों को लगा चुनाव की रेलम-पेल में उनके प्रवास में खलल पड़ सकती है."
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