अमरीका में क्यों चर्चित है 66 साल की यामिनी की रसोई
66 साल की यामिनी जोशी न्यूयॉर्क सिटी के क्वीन्स में अपने घर की रसोई में खाना बना रही हैं. उनके आसपास कई लोग खड़े हैं जो उनको काम करते हुए बारीकी से देख रहे हैं.
कई तरह की पतीलियों में सब्ज़ियां पकाते हुए यामिनी कहती हैं, "ऐसा लगता है कि मैं दुनिया से बाहर हूं. मैं किसी और चीज के बारे में नहीं सोचती. मैं कोशिश करती हूं कि 100 फ़ीसदी वही स्वाद आए."
यामिनी अमरीका में भारतीय मूल की प्रवासी हैं. वो मुंबई की हैं और न्यूयॉर्क सिटी में रहती हैं.
वो कुकिंग इंस्ट्रक्टर हैं जो खाना बनाना सीखने के इच्छुक युवाओं को अपनी रसोई में ट्रेनिंग देती हैं.
यामिनी न्यूयॉर्क के मुख्य बिज़नेस सेंटर मैनहट्टन में एक जूलरी शॉप में काम करती हैं. हफ़्ते में कम से कम तीन वीकेंड पर वह अपने छात्रों के एक समूह को भोजन तैयार करना सिखाती हैं.
यह ट्रेनिंग देने से उनकी कमाई भी होती है, जिससे उनको न्यूयॉर्क सिटी में अपने खर्च पूरे करने में मदद मिलती है.
वो कहती हैं, "मैं एक जूलरी कंपनी में काम करती हूं. वहां से मैं जो भी कमाती हूं, वह मेरे लिए पर्याप्त नहीं है. खाना बनाना मेरा जुनून है. इससे मेरी आमदनी में एक बहुत अच्छा सहारा भी मिल जाता है."
यामिनी की कुकिंग क्लासेज़ में कुछ परिवार भी शामिल होते हैं, लेकिन उनके छात्रों में ज्यादातर मिलेनियल्स हैं जिन्होंने घर में खाना बनाना नहीं सीखा. अब असली ज़ायके की तलब उनको रसोई तक खींच ले आई है.
वो अपने छात्रों को शुद्ध भारतीय व्यंजन बनाना सिखाती हैं, जिसे उन्होंने अपने परिवार में सीखा था.
यामिनी लीग ऑफ़ किचेन्स से जुड़ी प्रशिक्षक हैं. इस संगठन ने न्यूयॉर्क सिटी और लॉस एंजिलिस में रहने वाली प्रवासियों को काम पर रखा है. उनका काम है विश्वसनीय ज़ायके बनाना सिखाना.
ये प्रशिक्षक परंपरागत पारिवारिक भोजन के ज़रिए अपनी संस्कृति से जुड़ी रहती हैं. खाना बनाने की ट्रेनिंग वे अपने घर पर देती हैं.
यामिनी जोशी की तरह ज़्यादातर इंस्ट्रक्टर प्रवासियों की कॉलोनी या पॉकेट में रहती हैं, जहां बाहर के लोगों का आना-जाना लगा रहता है.
यामिनी कहती हैं, "लोग भारतीय खाना पसंद करते हैं. आप कहीं भी चले जाइए. न्यूयॉर्क सिटी में भी यह बहुत लोकप्रिय है."
उनकी कुकिंग क्लासेज़ में आने वाले छात्रों में से ज़्यादातर को भारतीय खाने के बारे में पता होता है. लेकिन वे यह नहीं जानते कि इनमें वह ज़ायका कहां से आता है.
यामिनी कहती हैं, "मैं उनको अपने साथ काम कराती हूं जिससे वे यह सब सीख सकें."
कई युवा खाना बनाना बिल्कुल नहीं जानते. वो अपने परिवार के लोगों के साथ यह सीख भी नहीं पाते.
यामिनी की रसोई में वे नोट्स लिखते हैं. कई लोग खाना बनाने के तरीक़ों की वीडियो फ़ोटोग्राफ़ी करते हैं.
कई तरह की पतीलियों में सब्ज़ियां पकाते हुए यामिनी कहती हैं, "ऐसा लगता है कि मैं दुनिया से बाहर हूं. मैं किसी और चीज के बारे में नहीं सोचती. मैं कोशिश करती हूं कि 100 फ़ीसदी वही स्वाद आए."
यामिनी अमरीका में भारतीय मूल की प्रवासी हैं. वो मुंबई की हैं और न्यूयॉर्क सिटी में रहती हैं.
वो कुकिंग इंस्ट्रक्टर हैं जो खाना बनाना सीखने के इच्छुक युवाओं को अपनी रसोई में ट्रेनिंग देती हैं.
यामिनी न्यूयॉर्क के मुख्य बिज़नेस सेंटर मैनहट्टन में एक जूलरी शॉप में काम करती हैं. हफ़्ते में कम से कम तीन वीकेंड पर वह अपने छात्रों के एक समूह को भोजन तैयार करना सिखाती हैं.
यह ट्रेनिंग देने से उनकी कमाई भी होती है, जिससे उनको न्यूयॉर्क सिटी में अपने खर्च पूरे करने में मदद मिलती है.
वो कहती हैं, "मैं एक जूलरी कंपनी में काम करती हूं. वहां से मैं जो भी कमाती हूं, वह मेरे लिए पर्याप्त नहीं है. खाना बनाना मेरा जुनून है. इससे मेरी आमदनी में एक बहुत अच्छा सहारा भी मिल जाता है."
यामिनी की कुकिंग क्लासेज़ में कुछ परिवार भी शामिल होते हैं, लेकिन उनके छात्रों में ज्यादातर मिलेनियल्स हैं जिन्होंने घर में खाना बनाना नहीं सीखा. अब असली ज़ायके की तलब उनको रसोई तक खींच ले आई है.
वो अपने छात्रों को शुद्ध भारतीय व्यंजन बनाना सिखाती हैं, जिसे उन्होंने अपने परिवार में सीखा था.
यामिनी लीग ऑफ़ किचेन्स से जुड़ी प्रशिक्षक हैं. इस संगठन ने न्यूयॉर्क सिटी और लॉस एंजिलिस में रहने वाली प्रवासियों को काम पर रखा है. उनका काम है विश्वसनीय ज़ायके बनाना सिखाना.
ये प्रशिक्षक परंपरागत पारिवारिक भोजन के ज़रिए अपनी संस्कृति से जुड़ी रहती हैं. खाना बनाने की ट्रेनिंग वे अपने घर पर देती हैं.
यामिनी जोशी की तरह ज़्यादातर इंस्ट्रक्टर प्रवासियों की कॉलोनी या पॉकेट में रहती हैं, जहां बाहर के लोगों का आना-जाना लगा रहता है.
यामिनी कहती हैं, "लोग भारतीय खाना पसंद करते हैं. आप कहीं भी चले जाइए. न्यूयॉर्क सिटी में भी यह बहुत लोकप्रिय है."
उनकी कुकिंग क्लासेज़ में आने वाले छात्रों में से ज़्यादातर को भारतीय खाने के बारे में पता होता है. लेकिन वे यह नहीं जानते कि इनमें वह ज़ायका कहां से आता है.
यामिनी कहती हैं, "मैं उनको अपने साथ काम कराती हूं जिससे वे यह सब सीख सकें."
कई युवा खाना बनाना बिल्कुल नहीं जानते. वो अपने परिवार के लोगों के साथ यह सीख भी नहीं पाते.
यामिनी की रसोई में वे नोट्स लिखते हैं. कई लोग खाना बनाने के तरीक़ों की वीडियो फ़ोटोग्राफ़ी करते हैं.
Comments
Post a Comment