न्यूजीलैंड ने दूसरे टी-20 में भारत को 4 विकेट से हराया, सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बनाई

न्यूजीलैंड महिला क्रिकेट टीम ने तीन मैच की सीरीज के दूसरे टी-20 में शुक्रवार को यहां ईडन पार्क में भारत को चार विकेट से हरा दिया। इसके साथ ही उसने सीरीज में 2-0 से अजेय बढ़त बना ली। न्यूजीलैंड ने पहला टी-20 23 रन से जीता था। न्यूजीलैंड की सूजी बेट्स प्लेयर ऑफ द मैच चुनी गईं।

भारत ने न्यूजीलैंड को 136 रन का लक्ष्य दिया था

इस मैच में न्यूजीलैंड ने टॉस जीतकर गेंदबाजी का फैसला लिया। भारतीय टीम ने 20 ओवर में 6 विकेट पर 135 रन बनाए। उसकी ओर से जेमिमा रोड्रिगेज के 53 गेंद पर 72 और स्मृति मंधाना ने 27 गेंद पर 36 रन की पारी खेली। हालांकि, इन दोनों के अलावा उसकी कोई भी खिलाड़ी दहाई के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाई। न्यूजीलैंड के लिए रोजमैरी मेयर ने 17 रन देकर दो विकेट अपने नाम किए। सोफी डिवाइन, एमेलिया केर, लेघ कैसपेरेक ने 1-1 विकेट लिए।

न्यूजीलैंड ने आखिरी गेंद पर एक रन लेकर लक्ष्य हासिल किया

लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड मैच की आखिरी गेंद पर मैच जीत लिया। उसका स्कोर 20 ओवर में 6 विकेट पर 136 रन रहा। उसकी ओर से सूजी बेट्स ने सबसे ज्यादा 62 रन बनाए। उन्होंने 52 गेंद की अपनी पारी के दौरान पांच चौके लगाए। सूजी के अलावा ओपनर सोफी डिवाइन ने 16 गेंद पर 19, एमी सैटर्थवेट ने 20 गेंद पर 23 और कैटी मार्टिन ने 12 गेंद पर 13 रन बनाए। भारत के लिए राधा यादव ने 23 और अरुंधति रेड्डी ने 22 रन देकर 2-2 विकेट लिए। मानसी जोशी और पूनम यादव ने 1-1 खिलाड़ी को पवेलियन भेजा।

चार तरह के बिहेवियर पहचान सकता है रॉबी
डॉ. बेहेरा के मुताबिक, इस रोबोट को डिजाइन करने का मकसद ऐसे लोगों की मदद करना है, जो अकेले रहते हैं और अकेलेपन में उन्हें अपनी मदद के लिए किसी की जरूरत होती है। उन्होंने बताया, "रॉबी पहला ऐसा रोबोट है जो विजन-बेस्ड रिकग्निशन तकनीक का उपयोग करता है। इसकी मदद से ये एग्रेसिव, डिप्रेसिव, खुशी और न्यूट्रल चार तरह के बिहेवियर समझने में सक्षम है।"

उन्होंने दावा किया कि रॉबी इस बात का पता भी लगा सकता है कि डिमेंशिया से पीड़ित व्यक्ति क्या परेशानी में है? वह उसे शांत करने के लिए हल्का म्यूजिक बजा सकता है। टीम ने दावा किया है कि रॉबी 80 तरह की इंसानी भावनाओं को भी समझ सकता है और एक दिन इसका इस्तेमाल डिमेंशिया को ठीक करने में किया जाएगा।

इस तरह मदद कर सकता है ये रोबोट
टीम में शामिल एक छात्र जैचरी व्हार्टन का कहना है, "रॉबी को तैयार करने का मकसद डिमेंशिया से पीड़ित व्यक्ति के बिहेवियर को समझना है। साथ ही ये पता लगाना है कि पीड़ित व्यक्ति कब और कैसे गुस्सा दिखाना शुरू करता है और खुद को शांत करने के लिए क्या करता है।"

व्हार्टन ने बताया कि जब डिमेंशिया से पीड़ित व्यक्ति किसी परेशानी में होता है तो उसे शांत करने का सबसे अच्छा तरीका है कि उसके साथ खेलें, गाने सुनाएं या उससे बात करें और ये सब रॉबी कर सकता है। ये रोबोट न सिर्फ पीड़ित व्यक्ति के जीवन का अहम हिस्सा बन सकता है बल्कि उन्हें ठीक होने में भी मदद कर सकता है।

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